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आजादी काजश्न मनायें

लाल बिहारीलाल   आजादीका जस्न मनायें,   आओं मिलकर हम और आप   इसेअच्छून बनायें आज,   आओंमिलकर हम और आप   आजादीका जस्न मनायें...     कहींगोला कहीं बम चले थें   कितनोके ही दम निकले थें   तब जाकेअंग्रैज यहाँ से   देखोंभागे कर बाप रे बाप   आजादीका जस्न मनायें.....     नियमकानून सब ध्वस्त हो गये   जोजागे थो वो भी सो गये   जनताकर रही थी त्राहि-त्राहि   तबमुक्ति दिलाये गांधी सुभाषण्   आजादीका जस्न मनायें....... कहाजा रहा

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कंठ में बांसुरी के उतर कर तो देखो

शोभा सचान  कंठ में बांसुरी के उतर कर तो देखो शब्द की चांदनी में संवर कर तो देखो कितनी स्याही बची है तेरी लेखनी में पिछले पन्नों को अपने पलट कर तो देखो बड़ी तीखी धूपें हैं इस सर ज़मीन की नमी ओस की कुछ बचा कर तो देखो बड़ी खामियाँ देखता है तू सब में खुद को

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कृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष

फ़िरदौस ख़ान   तुमसे तन.मन मिले प्राण प्रिय! सदा सुहागिन रात हो गई होंठ हिले तक नहीं लगा ज्यों जनम.जनम की बात हो गई राधा कुंज भवन में जैसे सीता खड़ी हुई उपवन में खड़ी हुई थी सदियों से मैं थाल सजाकर मन.आंगन में जाने कितनी सुबहें आईंएशाम हुई फिर रात हो गई होंठ हिले तक नहींएलगा ज्यों जनम.जनम

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